
धनबाद ब्यूरो : नीतीश कुमार की रिपोर्ट,
धनबाद : जिले में बहुत चर्चित रिंग रोड घोटाले के पीड़ित रैयत रसिक मुर्मू ने आज इलाज के भाव में दम छोड़ दिया 2011 में घनसार थाना क्षेत्र के दुहाटांड आदिवासी टोला के दर्जनों आदिवासियों की जमीन रिंग रोड के नाम पर आतीग्रहण की गई थी ।पर बिचौलियों के द्वारा फर्जी कागजात के बल पर मुआवजे की राशि हड़प ली गई। हालांकि इसको लेकर 2016 में समाजसेवी रमेश राही मामला दर्ज कर दो दिन पूर्व ही ऐसीबी की टीम ने कार्रवाई कर 34 में 17 लोगों को जेल भेजने का काम किया है ।पर पर रैयतै को मुआवजे की राशि नहीं मिली मुआवजे की राशि के इंतजार में आज एक रैयत ने दम तोड़ दिया परिजनों की माने तो वर्ष 2011 में रिंग रोड के नाम पर जमीन ली गई थी पर आज तक मुआवजा नहीं मिला जिसको लेकर कई बार उनके द्वारा आंदोलन भी किया गया स्थिति ऐसी थी कि रैयत अपने ही जमीन के बदले में पैसे नहीं मील पाने से दाने दाने के मोहताज थे। और पैसों की कमी की वजह से इलाज नहीं हो पाया और उनकी मौत हो गयी । वही मामले में समाजसेवी रमेश राही ने हेमंत सोरेन की सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक और सरकार आदिवासियों के हितैसी होने का दम भरती है । पर झारखंड में आदिवासियों को ही उनका हक नहीं मिल पाता और बिचौलिए फायदा उठा ले जाते हैं करवाई तो की गई है। पर अगर समय पर रैयत को उनके मुआवजे की राशि मिल जाती तो शायद आज यह दिन नही देखना पड़ता उन्होंने बतलाया कि मृतक के 25 डिसमिल जमीन रिंग रोड में गई थी जिसका मुआवजा तकरीबन 54 लाख रुपए के करीब होता है उन्होंने आगे सरकार और जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि जल्द से जल्द आरोपियों द्वारा गबन की गई राशि वसूलकर रैयतों को दी जाए ताकि पैसों के अभाव में किसी भी गरीब आदिवासी जान न जाए ।









